संदेश

करणी-स्तवन

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🔱  करणी-स्तवन 🔱 जय जय भवानी अम्बिके करनी तुम्हारी शरण हम | बहुत   सोये   गाढ़  निद्रा, चाहते  जागरन   हम | स्वातंत्र्य की तू महासागर , तेरे ही हैं निर्झरण हम ||१||                                    जय जय भवानी..... क्षात्र बल का उद्धरण तैंने किया, अनुसरण हम | परमार्थ में बलिदान अपना, कर सिखा दें मरण हम ||२||                                       जय जय भवानी..... संतान सच्चे अभय हों, तेरे ही तारण-तरण हम | सामर्थ्य दो मॉं कर सकें, यह सिद्ध चारण वरण हम ||३||                                    जय जय भवानी..... वाहन तुम्हारा 'केहरी', वर मॉंगता अशरण-शरण | हे असुर -मर्दिनी ! चण्डिके! भूलें न तेरे चरण हम ||४|| जय जय भवानी अम्बिके करनी तुम्हारी शरण हम | ठा. केसरीसिंह (कोटा)

हिंगलाज महिमा दूहा

  हिंगलाज  महिमा  दूहा _ दीन दुखी आवैं सदा , हिंगलाज  दरबार | जगदम्बा सबकी सूनैं , करैं भक्त उद्धार || कर रक्षा  हिंगलाज  माँ , रखती सेवक लाज | जो दुखिया आवै शरण, करती अम्बा काज || सेवकगण निर्भय  रहैं ,तय बलबूते मात | विपद पड़े रक्षा  करे , क्षण न लगावे जात || निसन्तान दरबार में, आ पाते सन्तान | कर पूरी मन कामना ,रखती उनका मान || जन हितकारी अम्ब तू , जग जाहिर  तव नाम | पार लगाती भक्त के , अर के सारे काम || हिंगलाज  तत्पर  रहै, सुनने करुण पुकार | दीन दुखी के दुख हरै, देकर सदा दुलार || अत्याचार अनीति से , होवै हा हा कार | तुरंत  मात हिंगलाज  ले , जन हित  में अवतार || दनुज दुष्ट संहार कर, हर वसुधा का भार | हिंगलाज  सब कर अभय, जावै पुनः सिधार || भीम लोचन भैर वाह, पुजै पीठ हिंगलाज | अति प्रिय  माँ का लाडला ,करै भक्त हित काज || हिंगलाज  वरदायिनी ,महिमा अपरम्पार | शेषनाग नहीं कह सके ,जाके जीभ हजार || हिंगलाज  जग पालती , हरती विपद कलेश | बैठ पाक मत भूलना ,अपना आयभारत देश ||

Moong Toast Recipe मूंग दाल टोस्ट रेसिपी

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How to make a Moong dal tost recipe :- सामग्री :  मूंगदाल -  1कप  हरी मिर्च 2, हल्दी 1/4 छोटा चम्मच, काली मिर्च पाउडर 1/4 छोटा चम्मच  नमक स्वादानुसार  हींग 1 चुटकी, प्याज 1/2 बारीक कटा हुआ,  गाजर 1/2 घिसी हुई, शिमला मिर्च 1/2, हरा धनिया, मक्खन व  ब्रेड  ऐसे बनाएं  - बड़े बर्तन में करीब दो घंटे के लिए मूंगदाल को भिगोकर रखें,  पानी निकालकर बारीक व गाढ़ा पीस लें, पीसी हुई दाल को बड़े बर्तन में डालें, इसमें हल्दी, नमक, काली मिर्च, जीरा, हींग डालकर अच्छी तरह मिक्स करलें, फिर प्याज, गाजर, शिमला मिर्च, हरा धनिया डालें, अब एक ब्रेड को गर्म करे, तवे पर और ब्रेड की दोनों तरफ से मक्खन लगाते हुए सेंके | दोनों तरफ से भूरा होने तक सेंक लें, मूंगदाल टोस्ट  अब तैयार है आपका मूंगदाल टोस्ट, इसे आप टमाटर सॉस के साथ परोसें | धन्यवाद 

रचना : ये जनता भोली-भाली है

  सत्ता को क्या सबक सिखाएं जनता भोली भाली हे  आपस में ही लड़ती रहती एक पेड़ की डाली है जब तक  लड़ती रहेगी जनता नेता मोज मनाएंगे मृगतृष्णा सा झांसा देकर ठगकर वोट कमाएंगे सत्ता का दुरुपयोग चरम पर भारत माता रोती है न्याय व्यवस्था दफ्तर दफ्तर कुंभकरण सी सोती है सत्ता तो बदली जाएगी याद करेगा कौन तुम्हे  पर जनता के  उन प्रश्नों पर होना होगा मौन तुम्हे न्याय तंत्र के खंभों को कमजोर कर दिया  है जिसने सुरज  सा रोशन भारत  घनघोर कर दिया है जिसने उसे मिले क्यों बैल जेल से , उसे मिले क्यों आज़ादी सत्ता का शासन उसको ? जो करे वतन की बर्बादी बर्बादी का दौर मिटाने अब हमको जगना होगा  सही गलत का फर्क दिखाने ,हम सबको लगना होगा  झूठे कामों का पैसा रख  काम गिनाया जाता है वोट जीतकर जनता को हर रोज हराया जाता है अजब गजब का खेल खेलते सत्ता को हथियाने को  जहरीले अपने बन जाते वोटों  में जितवाने को  जात पात की बात बताकर दंगों को भड़काते हैं  अमन चैन कहने वाले गुंडों के दर खड़काते हैं दाव खेलते राजनीति के शुकुनी भी शरमा जाए  मृगतृष्णा सा मोह दिखाते जनता भी भरमा जाए आज़ादी के दीवानों ने क्या सपने देखे होंगे  हंसते ख

लेखक :गजेंद्र चारण, कविता : - बस उत्प्रेरित होकर चल ले अब |

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  कब तक झेलेंगे तपिश आग की  कब तक तरसेंगे मेघ, पवन को  कब तक  कोसें इस दुनिया को  कब तक कोसें अंतर्मन को  अच्छा है राह बदल लें अब  कुछ सबक जानकर चल लें अब  छोड़े मृग तृष्णा  मोह तभी  उलझन के थार का पार मिले  बस उत्प्रेरित होकर चल लें  ताकि मेहनत को धार मिले कंटक चुभते दुखते पग में  पर जिनके साहस हो रग में ना विचलित होते क्षण भर भी  राही बन कदम बढ़ाते जाते  लड़ते ,गिरते चुभते दुखते  संघर्ष गीत  को गाते जाते   रुके नहीं , सब सहकर चल लें  ताकी मंजिल का द्वार मिले  बस उत्प्रेरित होकर चल लें  ताकि मेहनत को धार मिले गिरता है  मनोबल  झरनों सा मेहनत पर जब पानी फिरता  पर स्तंभित रहने से बढ़कर  अधिक सुखद है फिर चलना  ताकी जर्जर से  महलों को  फीर से नव पुनरुद्धार मिले बस उत्प्रेरित होकर चल लें ताकी मेहनत को धार मिले हो पथ में शूल या दिशा शूल हर बाधा अंगीकार करें रुकें नहीं चलते पथ पर निज सपनों को साकार करें घोर तिमिर में उजियारे की  आशा लेकर चलना होगा ताकी नीरस से जीवन में   रस रसा स्वरूप संसार मिले  बस उत्प्रेरित होकर चल लें  ताकी मेहनत को धार मिले चाहे मंजर भयभीत बने  साहस की भय पर जीत बने हो क

स्तुति: श्री करणी माता जी

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स्तुति : करणी माता तर्ज:- होरी - धमाल करुणानिधि मात नमो ऐ करणी ||टैर|| किनियाँणी करुणा की सागर, बीसभुजा बडपण धरणी | जनम सुधारण, भव भय हारण, तारण भव सागर तरणी || वन्दित विश्व विधि अज विसनू, वैद पुराण सकल बरणी | मात समान महान दयानिधि, देव नहीं दूजो धरणी || सेवक हैत सचैत सदा ही, दु:ख दुविधा दारिद दरणी | परम कृपालु दया की मूरत, सब अपराध  क्षमा करणी || क्युँ मन सोच करे तूँ मूरख, (थाँरे) बैलु बीसभुजा धरणी | 'कर' कहता संकट झट काटत, 'नी' कहता निरभय करणी || बडपण विरद सहज वरदाई, शरण चरण नित हित सरणी | करणी नाय लखे माँ करणी, करणी तो किरपा करणी || चरणाम्बुज आश्रित चित चावत, हरसित हिय संकट हरणी | निज जन कष्ट निवारण कारण, कई कई रूप धारण करणी || छिन में छीन लियो सुत जम सूँ, मेटी म्रजात आद बरणी | साँचो सुरग दुरग दैशाणो, धणियप धार रच्यो धरणी || दीन दयाल दास हितकारी, महिमा कीरत मन हरणी | जीवन धन सरवस शिशु जय के, केवल नाम करणी || jai ma karni, jai mata ji 

कवित: बाल विवाह

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कविता : मुरधर रा मोती

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 ( परमवीर चक्र मेजर शैतानसिंह जी पर ) कवि :- कानदान जी कल्पित    फ़र्ज़ चुकायो थे समाज रो , मुरधर रा मोती ,मारग लियो थे रीति रिवाज़ रो ।   बोली माता हरखाती , बेटो म्हारो जद जाणी, लाखां लाशा रे ऊपर सोवेला जद हिन्दवानी। बोटी बोटी कट जावै ,उतरे नहि कुल रो पाणी। अम्मर पीढयां सोढानी पिता री अमर कहानी । ध्यान कर लीजे इण बात रो , मुरधर रा मोती दूध लाजे ना पियो मात रो।   सूते पर वार न कीजो ,धोखे सूँ मार न लीजो । साम्ही छाती भिड़ लीजो,गोला री परवा नाहीं। बोली चाम्पावत राणी, पीढयां अम्मर धर कीजो। फ़र्ज़ चुकायो भारत मात रो , मुरधर रा मोती , सूरज सोने रो उग्यो सांतरो ।   राणी री बात सुणी जद , रगत उतरयो नैना में । लोही री नई तरंगा ,लाली छाई अंग अंग में । माता ने याद करी जद ,नाम अम्मर मरणा में। आशीसा देवे जननी , सीस धरियो चरणा में। ऊग्यो अगवानी जुध्ध बरात रो , मुरधर रा मोती , आछो लायो रे रंग जात रो।   धम धम उतरी महलां सूँ ,राणी निछरावल करती । बालू धोरां री धरती, मुळकी उमंगा भरती । आभो झुकियो गढ़ कांगरा,डैना ढींकी रण झरती। पोयां पग धरता बारै , पगल्याँ बिलूम्बी धरती। मान बधाज्यो बिन रात रो , मुरधर रा

श्री अम्बा जी की संध्या आरती

  श्री अम्बा जी की संध्या आरती जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥ जय अम्बे गौरी माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥ जय अम्बे गौरी कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥ जय अम्बे गौरी केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी। सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी। जय अम्बे गौरी कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥ जय अम्बे गौरी शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥ जय अम्बे गौरी चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे। जय अम्बे गौरी ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी। आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥ जय अम्बे गौरी चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ। बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥ जय अम्बे गौरी तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥ जय अम्बे गौरी भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी। मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥ जय अम्बे गौरी कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमा

शिव क्षमा प्रार्थना

 जय शिव शंकर, जय महादेव 

दुर्गा क्षमा मंत्र

जय मां भवानी

घर परिवार में सुख शांति के लिए सुने ये मानस चौपाई

जय मां भवानी Photo

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प्रसिद्ध रचना :- कृष्ण की चेतावनी

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Created with by ARJUN Get in touch on ------------------------------------------------------------------- -------------------------------------------------  रामधारी सिंह दिनकर :- वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर। सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें, आगे क्या होता है। मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को, दुर्योधन को समझाने को, भीषण विध्वंस बचाने को, भगवान् हस्तिनापुर आये, पांडव का संदेशा लाये। ‘दो न्याय अगर तो आधा दो, पर, इसमें भी यदि बाधा हो, तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रक्खो अपनी धरती तमाम। हम वहीं खुशी से खायेंगे, परिजन पर असि न उठायेंगे! दुर्योधन वह भी दे ना सका, आशीष समाज की ले न सका, उलटे, हरि को बाँधने चला, जो था असाध्य, साधने चला। जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है। हरि ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरूप-विस्तार किया, डगमग-डगमग दिग्गज डोले, भगवान् कुपित होकर बोले- ‘जंजीर बढ़ा कर साध मुझे, हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे। यह देख, गगन

चैत्र नवरात्री मुहूर्त

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जानिए घटस्थापना मुहूर्त: चैत्र घटस्थापना मंगलवार 13 अप्रैल 2021 को घटस्थापना मुहूर्त- 05:58 AM से 10:14 AM अवधि- 04 घण्टे 16 मिनट घटस्थापना अभिजित मुहूर्त- 11:56 AM से 12:47 PM अवधि- 51 मिनट प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ- 12 अप्रैल 2021 को 08:00 AM बजे प्रतिपदा तिथि समाप्त- 13 अप्रैल 2021 को 10:16 AM बजे धन्यवाद जय माँ भवानी

Short Story विश्वास की जीत

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                              लघुकथा  [ विश्वास की जीत ]                                   आज सुबोध को अपने  दोस्तों के साथ रेलवे  प्लेटफाॅर्म पर खड़े दो घंटे से भी ज्यादा समय बीत चूका था | घड़ी की बढ़ती सुइयों के साथ उसके दिल की धड़कन भी तेजी से बढ़ती जा रही थी | तभी उसके मोबाइल की घंटी बजी | उस ओर से सुमन ने उसके हैलो बोलने की प्रतीक्षा किए बिना ही बोलना शुरू  कर दिया सुबोध हो सके तो मुझे माफ कर देना, पर मैं तुम्हारे लिए अपने माता - पिता को धोखा नहीं दूंगी | हां, तुम्हारे प्यार में मेरे कदम बहक जरूर गए थे , पर भगवान का शुक्र है कि समय रहते ही मुझे मेरी गलती का अहसास हो गया वरना मेरे माता -पिता तो जीते जी ... कहते उनका गला रुंध गया । सुबोध इधर से कुछ कहता इसके पहले ही सुमन फोन काट चुकी थी| बात करते सुबोध का फोन स्पीकर पर था, अत: उसके पास ही खड़े उसके दोस्त भी सुमन की पूरी बात सुन चुके थे | फिर दोस्तों ने सुबोध की आँखों में झांककर उसे डपटते हुए कहा कि हमने ऐसे कई किस्से सुने है , जहां प्यार में लड़कों ने लड़कियों को धोखा दे दिया , पर यहां तो एक लड़की ने । इस पर भी तू बजाय गुस्सा होने औ

Happy Holi

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चोर आपस में लड़े तो सच निकलता है |

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Happy Mahashivratri

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लिंंग थापि बिधिवत करी पूजा । सिव समान प्रिय मोही  न दूजा ||

Happy Makarsankranti

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  आप व आपके पूरे परिवार गणों को KarniPatrika की ओर से मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई |

तुलसी माता की उपयोगिता

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तुलसी माता    जय माँ तुलसी  हमारे आस-पास पाए जाने वाले पौधों में सबसे उपयोगी एवं गुणकारी पौधा है, तुलसी. एक से तीन फुट ऊँचा यह पौधा अपने गुणो के कारण सबसे ऊचा माना जाता है. इसके सात से आठ प्रकार होते है जिनमें कृष्णा तुलसी जिसकी पत्तियाँ कुछ बगनी रंग की होती है और दूसरी प्रजाति है तुलसी जिसकी पत्तियाँ हरी होती है, यह माना जाता है  हरि. तुलसी का महत्व हमारे वेद, पुराण एवं आयुर्वेद में भी विर्णित है. घर में तुलसी का होना शुभ, पवित्र एवं लाभदायक माना जाता रहा है. Click Now   भारतीय संस्कृति में तुलसी पूजन का एक अलग ही महत्व है क्योंकि तु लसी को माता के रूप में देखा जाता रहा हैजो पोषण करती है. धािमकर् मानयताओं के साथ-साथ तु लसी के अनेक औषधीय गु ण है जैसे प्रतिदिन ४ से ६ तु लसी के पत्तियां को पीस कर उनका सेवन करने से शरीर की रोगप्रितरोधक क्षमता (इम्युनिटी पॉवर) बढ़ती है. सर्दी, खाँसी, जुकाम जैसी सामास्याओं को तुलसी के पत्ते का प्रतिदिन सेवन करने से; जैसे उसकी चाय या काढ़ा बनाकर पीने से जड़ से मिटा सकते है श्वास और सांस संबंधित समस्याओं में और मानिसक तनाव को कम करने के लिए भी तुलस

स्तुति: करणी माता जी की , करूणानिध……

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रचना: कैसे कविता मान लिया

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कविता: जन-जन रै मन हेत चाहीजे

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सुविचार

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Ganesha nice pic

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।।श्री विनायक वन्दना।।

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श्री विनायक वन्दना     ।।दोहा।। गण नायक गिरिजा तनय, गार वरण गुणधाम। प्रथम पुज्य भव पुत्र ने, पुनि पुनि करु प्रणाम।। मोदक प्रिय मन मोद सूँ, पूरण कृपा प्रकाश । हरसित हुय निज दास हिय, निशदिन करो निवास।।           -छप्पय- अखिल अमर  अगवाण, नमो जय गौरी नन्दन । देवण बुध दातार, करु प्रथम पद वंदन।। विहँसी ह्रदय विराज, करो घट ज्ञान उजालो । नयन अमी निज दास,भला बुध वारिध भाळो ।। निज वरद विनायक रुप धर, (थिर) थाण हिये मम थापिये । गुण गान मात धण कर सकू, ऐम बुद्धि मों आपिये।। २  भुजा चार शशि भाळ, माळ मुकता मन मौंहे। स्वर्ण मुकुट सिर छत्र, विविध आयुध कर सौहे।। गौर वरण गुण धाम नाम अघ तिमिर नशावें। आप सुजस अणपार, पार कोईवनहीं पावें।। बुध विमल बगस निज दास, अमित कृपा उर आणिये। अतिशय उदार समरथ महा,(निज) पावन विरद पिछाणिये।।       ।।दोहा।। गौरी नन्दन गणपती, दयावन्त दातार । सदबुद्धि बगसो सदा, आप दया उर धार ।। गज आनन गौरी सुवन , लम्बोदर गणराज। आय बसो उर मायने, महर करो महाराज।।

पोहा मावा लड्डू

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चिल्ड स्मूदी # फ्रूट स्मूदी

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          चिल्ड स्मूदी  सामग्री:- 1 कप अनानस, दो सेब ,एक केला , आधा तरबूज ,दो कप दूध ,अक कप दही ,१५(15) बादाम  ,दो चम्मच शहद, चीनी राबतानुसार । विधि :- सेब को और तरबूज को काट कर बीज निकाल लें। मिक्सी में सारे फलों के टुकड़ो को बादाम ; दूध ; दहू ; शहद और चीनी को साथ मिलाएं।  इसे अच्छे से ग्राइड कर ले तैयार हो  गयी मिक्सड फ्रूट स्मूदी । @ इसे ग्लास में बर्फ के टुकड़ो के साथ भी सर्व कर सकते है । चाहे तो स्मूदी को ज्यादा  डेकोरेटिव भी बना सकते है। ऊपर से स्ट्रेबरी या नींबू के छिल्के से भी डेकोरेट कर सकते है। धन्यवाद 

श्री खोड़ियाळ वन्दना

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।। आई श्री खोड़ियार वन्दना ।।       ।।दोहा-सोरठा ।। घरा माड धरती धिनो,धिन धिन चाळक ग्राम । धिन म्हांदा काछैल कुल, धिनु पितु मामड़ धाम ।। सातू बहिना संग में, शौभित बीच विवाण । पितु मामड़ घर प्रगटियां, काछैला कुळ भाण।। संवत आठ सौं आठ शुभ चैत नवम् शनीवार । माड धरा मामड़ घरे माँ ,आप लियो अवतार।। आई जद अवतरीह भार उतारण भौम रो । छबी तिण दिवसरीह, बरणी न आवै वैद सूँ ।। वाम कर त्रिशूल ब्राजे, वाहण ग्राह विशाल । अनुपम शौभा आपरी , खमां घणि खोड़ियाळ।। बढ़ायो विरद विचार, बंश सूरज रो बीसहथ । लंगरी आइ लार, राबचा सुँ राजेशरी।। सेवक करण सनात,हाथ धरो सिर ऊपरे । बंश बधाली मात, वन्दू थाँने बीसहथ।। प्राचि दिशा परभात, ऊगे अरक अवश्य ही । (इम)बंश बधाली मात, अटल भरोसों आपरो।। आवे होय अधीर, बाळकियां हित बाहरू। सुख में राखे सीर, काछैली करूणानिधे ।। संकट मांही सांकड़ी, रहे दास रें साथ। लाख रंग माँ लंगरी, बंश बधाली मात।। जय माँ खोड़ियाळ 

लिड़्गाष्टक (लिड़्गपुराण)

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सुनलो चलने वालो 'कविता'

सुनलो चलने वाले इतना, पथ चलते कोई खो मत जाना।  इस अन्दर की फटी बिवाई, कालीनों पर भुला न देना।। क्या रोता ही सदा रहूँगा, देख खून अपना ही। क्या मेरे जीवन का सपना, बना रहेगा सपना ही ।। तरस रहे नयनों के बादल,देखो वर्षा किए बिना। सुनलो चलने वाले इतना, पथ चलते कोई खो मत जाना। १ स्वाति बिना झोली भरती क्या, अन्तर के इस याचक की।  कितना तड़फ रहा है सागर, प्यास बुझाने चातक की।।२ कब तक चाँद समझ कर खाए, अँगारों को चकवा चुन कब तक मोती के धोखे में, हँस चुगें कंकर रे सुन।। मेेरे दर्द की दवा यही बस, तेरी तड़फन दे देना। सुनलो चलने वालो इतना, पथ चलते कोई खो मत जाना।।३ कितना दर्द लिए जलता हूँ, युग की झोली भरने को। क्या तुम भी आए हो बंधु, उसी आग में जलने को।। आये हो तो मुझे जलाकर, चले न जाना जले बिना। सुनलो चलने वालो इतना, पथ चलते कोई खो मत जाना।।४।।  श्री उम्मेदसिंह खींदासर 

मां दुर्गा के 108 नाम

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Jai ma bhawani 

जय मां आवड़ , Image

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Photography by Mobile(Realme) Photographer 'Gajendar Bithu

'कोरोना वायरस'| से बचाव के लिए क्या करें ।

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https://youtu.be/551IOzYkqDk सांसों की किसी तकलीफ़ से संक्रमित मरीज़ों के क़रीब जाने से लोगों को बचने की सलाह दी गई है। नियमित रूप से हाथ साफ़ करते रहें, ख़ासकर किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के फौरन बाद, पालतू या जंगली जानवरों से दूर रहने की सलाह भी दी गई है. कच्चा या अधपका मांस खाने से मना भी किया गया है। कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को छींक आने की सूरत में सामने खड़े लोगों को बचाने की सलाह दी गई है। जैसे नाक पर कपड़ा या टिशू रखना, सामने खड़े व्यक्ति से फासला बनाकर रखना, नियमित रूप से साफ़ सफ़ाई जैसे एहतियात बरतने की उम्मीद की जाती है। कृपया अपना व सभी का ख्याल रखें ।

नमस्ते भवानी छंद 'चंदबरदाई कृत'

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NAMASTE BHAWANI कवि चन्द वरदाई नमस्ते भवानी दोहा चिंता विघन विनाषनी, कमलासनी शकत्त वीसहथी हॅस वाहनी, माता देहु सुमत्त। छन्द भुजंगप्रयात नमो आदि अन्नादि तूंही भवानी तुंही जोगमाया तूंही बाक बानी तुंही धर्नि आकाष विभो पसारे तुंही मोह माया बिखे षूल धारे । 1। तुंही चार वेदं खटं भाष चिन्ही तुंही ज्ञान विज्ञाान मेे सर्व भीनी तुंही वेद विद्या चऊदे प्रकाषी कला मंड चोवीस की रूप राषी। 2। तुंही रागनी राग वेदं पुराणम तुंही जन्त्र मे मन्त्र में सर्व जाणम तुंही चन्द्र मे सूर्य मे एक भासै तुंही तेज में पुंज मेेे श्री प्रकाषै । 3। तुंही सोखनी पोखनी तीन लोकं तुंही जागनी सोवनी दूर दोखं तुंही धर्मनी कर्मनी जोगमाया तुंही खेचरी भूचरी वज्रकाया । 4। तुंही रिद्धि की सिद्धि की एक दाता तुंही जोगिनी भोगिनी हो विधाता तुंही चार खानी तुंही चार वाणाी तुंही आतमा पंच भूतं प्रमाणी । 5। तुंही सात द्वीपं नवे खंड मंडी तुंही घाट ओघाट ब्रह्मंड डंडी तुंही धर्