छंद: हरिगीत, आद सगती आवड़ा
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आद सगती आवड़ा
छन्द हरिगीत
कवि अनोपदानजी बीठू
गणेस गणपत दीजिये गत उकत सुरसत ऊजळी
वरणंत मैं अत कीरती व्रत सगतसूरत सांवळी
वै बीस हथ संू दीयै वरकत टाळ हरकत तावड़ा
भगवान सूरज करै भगती आदसगती आवड़ा। 1।
मामड़ चारण दुख मारण सुख कारण संमरी
दिव्य देह धारण कीध डारण तरण तारण अवतरी
समर्यां पधार्या काज सारण धन वधारण धावड़ा
भगवान सूरज करै भगती आदसगति आवड़ा ।2।
हिंगळाज माता हुल्लरातां दीप साता दरसणी
वरदान दाता विरद्यातां पालतां डग परसणी
बंधण जीवातां सोसवतां हालतां मग हाकड़ा
भगवान सूरज करै भगती आदसगति आवड़ा। 3।
बावन औरण रन्न वन्न दैत्य बावन तैं दल्या
थापना बावन ठौड़ थाई मढ़ बावन मोकल्या
बावन नांमां विजय बोले वीर बावन बांकड़ा
भगवान सूरज करै भगती आदसगति आवड़ा। 4।
आई क्रमळा नाम ऊभट पावणे आसापुरी
सिंघवी व्रत जोगणीस आईनाथज उच्चरी
कत्तियांणी नागणेची पीनोतणी नामे पड़ा
भगवान सूरज करै भगती आदसगति आवड़ा।5।
तुं रवेची चक्करेची सतरैची तूं सिंया
तूं चेडे़ची ऊनडे़ची माडेची मोटी मया
बोयणेची बड हाड़रे धंणियाणी धावड़ा
भगवान सूरज करै भगती आदसगति आवड़ा ।6।
तूं ताणेटी बींझणोटी भणयीणेची भूरा गिरी
आरणेची ओनासरी पाखेरीज पूनागरी
मांनसरी साते सऊवांणी तखत बैठी त्रेमड़ा
भगवान सूरज करै भगती आदसगति आवड़ा ।8।
छप्पय
आवड़ नै आवसी, ऐसी महा छत्राळी
गेल छेल गिरराय, रूप लांग रखवाळी
भेळो महरखियो भ्रातख् सात बैनां सुरराई
तात मांमड पूखतो, मोहवती जी माई
चारणी जात नव लाख चरित, त्रेमडे़राय मोटा तमां
कर जोड. बीठू अनोपो, नमस्कार नमो नमां।