समय सिखावे बात, समय बा भूल न पावे |
समय जे करदे घात, समय बो समझ न आवे ||
समय ज माड़ो आय, जतन करलो भाई जतरा |
समय हुवे नहीं साथ, रूदन करलो भाई कितरा ||
समय जो लागे घाव मिटे नहीं जन्म मरंता |
करो जे लाख उपाय हुवे नहीं मेल मिलंता ||
समय रचावे रास समय नर खेल बिगाड़े ||
समय बनावे भ्रात समय पग लाय अखाड़े |
समय जे विपरित होय समय कई बात सिखावे ||
समय जे ताके आप समय कई नाच नचावे |
इण समय रो ही है फेर, इता मत उछलो भायां |
रचना : समय, शिव चारण
ओ बैरी करग्या घात, बदल जावे ला काया |
चलो समय रे साथ, समय ज्या करे करण दो ||
ओ एक दिन होसी साथ किता दिन पग पटकण दो ||
ऊँचा बोले बोल बोलावो समय मिनख ने |
चुटकी में चुप होय करावे समय मिनख ने ||
समय-समय रा खेल समय मत भूलो भाईड़ा |
आज माड़ो है काल आवे ला आछो भाईड़ा || तेरी एक किरण, जीवन में जीत की आशा जगाती क्यों है
माड़े मे दे साथ जका नर होवे अपणा |
आछो देख झपाक चिपे बे बैरी आपणा ||
राग, द्वेष, मन, प्रीत , सबां ने समय हिलावे |
उत्तम प्रीत प्रवाह , जकां ने समय मिलावे ||
समय करावे क्रोध, समय नर शांत करावे |
समय मिलावे भाव, समय नर खड़-बड़ ज्यावे ||
समय जब होसी हाथ, मिला ला आमी-सामी |
समय जे दिनों साथ, कराला बात पुरानी ||
समय जे दीनी सीख, समय कवि कलम चलावे |
समय बताई बात, चारण शिव बंध सुणावे ||
( समय जो देवे साथ, कविता Share करावे )
रचयिता : शिवदान