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आयरलैंड के एक शख्स कैरान रॉन्सले (Caron Rawnsley) के जज्बे को सलाम! अनजान शहर को बना लिया अपना, 10 वर्षों से चला रहे खास मुहिम

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Caron Rawnsley : आयरलैंड के 77 वर्षीय कैरोन रॉन्सले जोधपुर घूमने आए थे, लेकिन शहर की ऐतिहासिक बावड़ियों और झालरों की बदहाली देखकर यहीं बस गए. बीते दस वर्षों से वे अकेले और युवाओं के साथ मिलकर जल धरोहरों की सफाई कर रहे हैं. चोटिल होने के बावजूद उनका जज्बा कमजोर नहीं पड़ा. आज कैरोन जोधपुर की जल विरासत को बचाने की मिसाल बन चुके हैं |


जोधपुर आमतौर पर विदेशी सैलानी किसी शहर की सुंदरता देखकर लौट जाते हैं, लेकिन आयरलैंड के 77 वर्षीय कैरोन रॉन्सले ने जोधपुर को सिर्फ देखा ही नहीं, बल्कि उसे संवारने का संकल्प भी ले लिया. करीब दस साल पहले पर्यटन के उद्देश्य से जोधपुर आए कैरोन जब शहर की ऐतिहासिक बावड़ियों और झालरों तक पहुंचे, तो उनकी स्थिति देखकर विचलित हो गए. कचरे, गंदगी और उपेक्षा से जूझ रही इन जल धरोहरों ने उनके मन में सवाल खड़ा कर दिया कि रेगिस्तान में पानी के इन अनमोल स्रोतों को आखिर यूं ही क्यों छोड़ दिया गया है|

यहीं से उनके जीवन की दिशा बदल गई. कैरोन ने तय किया कि वे इन पानी के घरों को दोबारा जीवित करने के लिए काम करेंगे. इसके लिए उन्होंने जोधपुर को ही अपना ठिकाना बना लिया. आज वे गोलनाड़ी क्षेत्र में किराए के एक साधारण कमरे में रहते हैं और भारतीय नागरिकता के लिए भी प्रयासरत हैं|

शुरूआत आसान नहीं थी, जब लोग उन्हें अकेले बावड़ियों में उतरकर कचरा निकालते, झाड़ू लगाते और गंदगी साफ करते देखते थे, तो कई लोग उन्हें पागल साहब कहकर पुकारते थे. लेकिन समय के साथ यही पागलपन लोगों के लिए प्रेरणा बन गया. बीते दस वर्षों में कैरोन राम बावड़ी, क्रिया झालरा, गोविंदा बावड़ी, चांदपोल बावड़ी, महिला बाग झालरा, तापी बावड़ी, महामंदिर झालरा और गुलाब सागर जैसे कई ऐतिहासिक जल स्रोतों की सफाई कर चुके हैं|

चोट के बावजूद सेवा का जज्बा कायम

हाल ही में उनका पैर फ्रैक्चर हो गया, जिसके कारण वे पहले जितने सक्रिय नहीं रह पाए हैं. इसके बावजूद उनके हौसले कमजोर नहीं पड़े. महामंदिर बावड़ी की सफाई के दौरान आज भी वे झाड़ू लेकर युवाओं के साथ खड़े नजर आते हैं. उनके साथ काम करने वाले युवा बताते हैं कि कैरोन अब भले ही ज्यादा शारीरिक श्रम न कर पाएं, लेकिन वे पूरे समूह के मार्गदर्शक हैं|


समाज और युवाओं की सहभागिता से ही बचेगी जल विरासत

कैरोन का मानना है कि यदि समाज और युवा मिलकर आगे आएं, तो शहर की धरोहरें सुरक्षित रह सकती हैं. आने वाले समय में वे अन्य संगठनों के सहयोग से जोधपुर के और भी स्थलों की सफाई का अभियान चलाने की तैयारी कर रहे हैं. विदेशी होकर भी जोधपुर की मिट्टी से जुड़ने वाले कैरोन आज सच मायनों में शहर की जल विरासत के सच्चे सिपाही बन चुके हैं